Best hindi mukatak by dr. kumar vishwash

mutak

डाॅ कुमार विश्वास

mutak
Dr. kumar vishwash

वो जो खुद में से कम निकलतें हैं
उनके ज़हनों में बम निकलतें हैं

आप में कौन-कौन रहता है
हम में तो सिर्फ हम निकलते हैं।

मेरे जीने में मरने में, तुम्हारा नाम आएगा
मैं सांस रोक लू फिर भी, यही इलज़ाम आएगा
हर एक धड़कन में जब तुम हो, तो फिर अपराध क्या मेरा
अगर राधा पुकारेंगी, तो घनश्याम आएगा

वो जिसका तीरे छुपके से जिगर के पार होता है
वो कोई गैर क्या अपना ही रिश्तेदार होता है
किसी से अपने दिल की बात तू कहना ना भूले से
यहां खत भी जरा सी देर में अखबार होता है।

मिल गया था जो मुक़द्दर वो खो के निकला हूँ.
में एक लम्हा हु हर बार रो के निकला हूँ.
राह-ए-दुनिया में मुझे कोई भी दुश्वारी नहीं.
में तेरी ज़ुल्फ़ के पेंचो से हो के निकला हूँ .

डाॅ कुमार विश्वास

source :- http://hindiguides.in/dr-kumar-vishwas-shayari-lyrics-sher-in-hindi-free-download/

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